जीवन परिचय

भारत भूषण की जीवनी | Bharat bhushan biography hindi

भारत भूषण की जीवनी | Bharat bhushan biography in hindi

भरत भूषण एक भारतीय कलाकार थे,वह एक हिंदी सिनेमा के स्क्रीपट राइटर,और प्रोड्यूर थे। उनका जन्म 14 जून 1920 को मेरठ में हुआ था ,  और भारतीय सिनेमा अपना अतुलनीय योगदान देने के बाद उन्होंने 71 बर्ष की उम्र में 27 जनवरी 1992 को मुम्बई , महाराष्ट्र में अपनी  आखिरी सांसे ली। उनके  योगदान और अभिनय को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

उनके बेस्ट  फिल्म अभिनय जिसको कभी भुलाया नहीं जा सकता है उस फिल्म का नाम था बैजू बावरा जिसके जरीये वे भारतीय सिनेमा में अपनी एक अलग ही छाप छोड़ गये ।

परिचय- भरत भूषण एक बनिया परिवार के मेरठ शहर से सम्बंध रखते थे.उनके पिता रायबहादुर मोतीलाल, वकील पेशे से सम्बंध रखते थे। उनकी माता जब वह दो वर्ष के थे तभी स्वर्गवासी हो गयी थी. उनके छोटे भाई एक  फिल्म प्रोड्यूसर थे,जिनकी खुद की आइडियल स्टूडियो लखनऊ में थी। भरत भूषण ने स्नातक की शिक्षा aligarh से प्राप्त की थी। उसके बाद वे अभिनय के लिये लिये कोलकाता चले गये जो पिता जी की इच्छा थी वहाँ उन्होनें   सिनेमा जगत को ज्वाईन किया उसके बाद पूर्ण रुप से अपने आप को मुम्बई में स्थापित कर लिया।

उसके बाद उन्होने मेरठ की एक उच्च घराने ,जमींदार रायबहादुर बुद्ध प्रकाश की पुत्री शारदा  से विवाह कर लिया और उनकी दो लड़की हुई जिनका  नाम अनुराधा  और अपराजिता था। अनुराधा में पोलियों से जुड़ी जटिलताएं थी।  फिल्म बरसात की रात के तुरंत बाद , 1960 के दशक के शुरु मे अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के बाद शारदा  की श्रमिक जटिलताओं से मृत्यु हो गई। 1967 में, उन्होंने अभिनेत्री रत्न से शादी की, फिल्म बरसात की रात में उनके सह- कलाकार से शादी की।

भारत , मुम्बई औऱ अन्य क्षेत्रों में भारत भूषण के स्वामित्व वाले बंगले। वह एक उस्साही पाठक थे और किताबों के संग्रह का दावा करते थे, जिन्हें उन्हें अक्सर बुरी बार में अपनी कारों और बंगलों की तरह बेचना पड़ता था। 27 जनवरी 1992 को जब वह अपने वित्तिय संकट से छुटकारा पाने में कामयाब रहे तो उनकी मृत्यु हो गई।

प्रोफेसनल लाइफ-

उन्होंने केदार शर्मा के साथ चित्रकला(1941) पर अपनी शुरुआत की । हालांकि, उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक हिंदी फिल्मों में बैजू बावरा(1952) कर एक निशान बनाने के लिये संघर्ष किया, जिससे उन्हें मोहम्मद रफी, मीना कुमारी, और नौशाद अली के साथ तत्काल स्टारडम और पौराणिक स्थिति दी। हालांकि  1950 और 1960 के दशक में हिंदी भाषा की फिल्मों में एक बहुत प्रतिभाशाली अभिनेता और एक प्रमुख सितारा , उन्होंने अक्सर फिल्मों में दुखद संगीतकारों की भूमिका निभाई। जिन फिल्मों में उन्होंने मुख्य अभिनेता के रुप अभिनय किया उनमें बसंत बहार शामिल है।

समकालीन  अभिनेता-निर्माता चंद्रशेखर कहते है , वह ऐतिहासिक और पौराणकि पात्रों को हिंदी फिल्मों में  सर्वेश्रेष्ठ चित्रित करता है। उन्होंने बरसात की रात, नयी उमर की नयी फसल, बसंत बहार, इत्यादि के लिए स्क्रिप्ट और कहानियाँ लिखीं। उनके भाई आऱ चन्द्र ने बेबस, मीनार और बसंत बहार जैसी कई फिल्मों बनाई।

वह 1954 में फिल्म श्री चैतन्य महाप्रभु के लिये दूसरे फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार प्राप्तकर्ता थे। रफी, मन्ना डे. तालत और मुकेश जैसे उस अवधि के प्रमुख गायकों के अधिकाँश महान गीत उनके बारे में चित्रित किए गए थे। वह हिंदी फिल्मों का पहला चॉकलेट-सामना करने वाला अच्छा दिखने वाला सितारा था। वह  उन कुछ कलाकारों में से एक थे जिनके पास संगीत की अच्छी भावना थी, इसलिए 1950 और 1960 के दशक में अधिकाँश संगीत- आधारित फिल्में उनके साथ प्रमुख भूमिका निभाई गई।

उन्होंने 1990 के दशक तक हिंदी भाषा फिल्मों में अभिनय किया। वह अब भी महान फिल्मों और महान गीतों के लिए भारतीयों द्वारा प्यार और सम्मानित हैं जिन्हें उऩ्होंने निजी त्रासदियों और उनके समकालीन लोगों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद दिया था। उन्हें हिंदी सिनेमा के महानतम सितारों और कलाकारों में से एक माना जाता हैं।

उनके जीवन की कुछ प्रमुख फिल्में—-

चित्र लेखा(1941), भाईचारा(1943), सावन,सुहाग रात, रंगीला राजस्थान, उधार, आँखे, बैजू बावरा, तूफान, आखिरी चेतावनी  प्यार का मौसम, तकदीर, नया कानून, बरसात की रात, फागुन, बसंत बहार , याराना, पहली शादी, माँ, सागर आदि उनके फिल्म करियर की प्रमुख फिल्में में जिनमें उनके शानदार अभिनय को निभाया है।

आवार्ड-

1.1995-फिल्म फेयर का बेस्ट कलाकार आवार्ड फिल्म चैत्न्य महाप्रभु के लिये दिया गया था।

2.1956-फिल्म फेयर के बेस्ट कलाकार के आवार्ड के नामित हुए थे उस फिल्म का नाम था मिर्जा गालिब

 

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