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मजदूर दिवस पर निबंध। Labour day Essay Hindi

मजदूर दिवस पर निबंध। Labour day Essay Hindi-

अंतरास्ट्रीय मजदूर दिवस को इंटरनेशनल लेबर डे और श्रमिक दिवस के नाम से भी जाना जाता है| इस अंतरास्ट्रीय पर्व को पूरे विश्व भर में मनाया जाता है| यह पर्व हर साल १ मई को मनाया जाता है| मजदूर हमारे समाज में बहुत महत्व है| उनसे ही हमारे समाज की सारी आर्थिक उन्नति तिकी हुई है| आज के समय के आधुनि मशीनरी के युग में भी उनका महत्व काम नहीं हुआ है
मजदूर हमारे समाज का वह तबका है जिस पर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी होती है । वह मानवीय श्रम का सबसे आदर्श उदाहरण है । वह सभी प्रकार के क्रियाकलापों की धुरी है । आज के मशीनी युग में भी उसकी महत्ता कम नहीं हुई है । उद्‌योग, व्यापार,कृषि, भवन निर्माण, पुल एवं सड़कों का निर्माण आदि समस्त क्रियाकलापों में मजदूरों के श्रम का योगदान महत्त्वपूर्ण होता है ।
मजदूर अपना श्रम बेचता है । बदले में वह न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करता है । उसका जीवन-यापन दैनिक मजदूरी के आधार पर होता है । जब तक वह काम कर पाने में सक्षम होता है तब तक उसका गुजारा होता रहता है । जिस दिन वह अशक्त होकर काम छोड़ देता है, उस दिन से वह दूसरों पर निर्भर हो जाता है । भारत में कम से कम असंगिठत क्षेत्र के मजदूरों की तो यही स्थिति है । असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की न केवल मजदूरी कम होती है, अपितु उन्हें किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा भी प्राप्त नहीं होती ।
संगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति कुछ अच्छी है । उन्हें मासिक वेतन, महँगाई भत्ता, पेंशन एवं अन्य सुविधाएँ प्राप्त हैं । उनके काम करने की दशाएँ बेहतर होती हैं । कार्य के दौरान मृत्यु होने पर उन्हें विभाग की ओर से सुरक्षा प्रदान की जाती है ताकि उनका परिवार बेसहारा न हो ।

मजदूर चाहे किसी भी क्षेत्र का हो, आर्थिक क्रियाकलापों में उसकी अग्रणी भूमिका होती है । वह सड़कों एवं पुलों के निर्माण में सहयोग करता है । वह भवन निर्माण के क्षेत्र में भरपूर योगदान देता है । वह ईटें बनाता है, वह खेती में किसानों की मदद करता है । शहरों और गाँवों में उसे कई प्रकार के कार्य करने होते हैं । तालाबों, कुओं, नहरों और झीलों की खुदाई में उसके श्रम का बहुत इस्तेमाल होता है । रिक्यहचालक, सफाई, कर्मचारी, बढ़ई, लोहार, हस्तशिल्पी, दर्जी, पशुपालक आदि वास्तव में मजदूर ही होते हैं । सूती वस्त्र उद्‌योग, चीनी उद्‌योग, हथकरघा उद्‌योग, लोहा एवं इस्पात उद्‌योग, सीमेंट उद्‌योग आदि जितने भी प्रकार के उद्‌योग हैं उनमें मजदूरों की भागीदारी अपरिहार्य होती है ।
वैसे तो जब से धरती पर प्रकृति का निर्माण हुआ है उनमे सर्वश्रेष्ठ रचना मानव की है जिन्हें इस दुनिया को चलाने के लिए श्रम यानि कार्य करने की आवश्यकता पड़ती है अब आप सोच रहे होंगे की भला जब हमारा जन्म हुआ ही है तो इस धरती पर कार्य भी क्रियान्वित करने ही पड़ेगे ऐसे में अगर हम अपने और अपने परिवार के लिए खूब दिन रात मेहनत करते है और उसके बदले हमे कुछ आर्थिक आमदनी भी होती है
तो जरा सोचिये अगर ऐसे में आपके हक का पैसे सही रूप से भुगतान न मिले और हमे अपने पैसे को पाने के लिए दर दर भटकना पड़े और तो और काम के बदले मिलने वाले पैसे में कोई हिसाब न हो और न ही काम करने का कोई समय समय बधा हो तो ऐसे में हर श्रम करने वाले के मन में सबसे पहले यही ख्याल आया हो की उसके हक़ का सही रूप में मिले इसी हक़ की लडाई के लिए पहली बार अमेरिका के मजदूरों ने 1 मई 1886 में हड़ताल किया और फिर तभी से 1 मई को मजदूर दिवस मजदूर दिवस मनाया जाने लगा ।

अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस International Labour Day-

वैसे तो मजदूर दिवस को अलग अलग देशो में अलग अलग नामो से जाना जाता है कही पर श्रम दिवस तो कही पर श्रमिक दिवस तो कही पर मई दिवस तो कही पर मजदूर दिवस  तो कही पर अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस के नाम से जाना जाता है मजदूर दिवस मनाने के पीछे का मूल उद्देश्य हर श्रमिक के अधिकारों की रक्षा करना है क्यूकी किसी भी देश, समाज, संस्था या राष्ट्र विकास निर्माण में मजदूरों का ही योगदान होता है मजदूरों के अथक प्रयास और मेहनत के बलबूते बड़े से बड़े काम को आसानी से किया जाता है मान लीजिये किसी भी देश में बड़े बड़े कल कारखाने तो हो जाए लेकिन वहा काम करने वाले श्रमिक ही न मिले तो भला सारी सुविधा रहते हुए वो देश कभी भी अपने बलबूते विकास की नीव नही रख सकता है अगर ये कल कारखाने बंद हो जाए तो फिर भला हम देश विकास की बात सोच भी नही सकते है

मजदूर दिवस का इतिहास Labour Day History in Hindi-

सबसे पहले हम यहाँ जानेगे की आखिर मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है | मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है इसके पीछे पूरे विश्व में मजदूरों के सम्मान में मजदूर दिवस  1 May को मनाया जाता है मजदूर दिवस  मनाने की शुरुआत सर्वप्रथम 1 मई 1886 से माना जाता है उस समय अमेरिका में मजदूरों की स्थिति काफी दयनीय थी मजदूरों को बिना रुके हुए 15 घंटे से भी ज्यादा वक्त काम करना पड़ता था जिसके फलस्वरूप अमेरिका के मजदूरों में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हड़ताल पर जाने का निश्चय किया और फिर 1 मई 1886 को पहली बार अमेरिका के शिकागो शहर में लाखो मजदूर हड़ताल पर थे सबकुछ शांतिपूर्वक चल रहा था सभी मजदूर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे की अचानक किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा इन मजदूरों के उपर बम फेका गया जिससे भीड़ तितर बितर हो गयी चारो तरफ भगदड़ का माहौल मच गया और इन सभी मजदूरो की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोली चला दी जिससे कई व्यक्ति मारे गये इस घटना को अमेरिकी इतिहास में हेयरमार्केट हत्याकांड के नाम से भी जाना जाता है फिर आगे चलकर इन मजदूरों की शहादत को याद को याद करने के लिए मजदूर दिवस मनाया जाने लगा
भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत सर्वप्रथम चेन्नई में सन 1923 से हुआ इसकी शुरुआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलु चेत्यार ने शुरू किया था जिसके तहत उस समय यह तय किया गया की इस दिन को कामगार दिवस के रूप में मनाया जायेगा

मजदूर दिवस कैसे मनाया जाता है-How to celebrated labour day

मजदूरों की हितो की रक्षा के उपलक्ष्य दिवस के रूप में प्रत्येक वर्ष 1 May को भारत सहित विश्व के 80 से अधिक देशो में मजदूर दिवस मनाया जाता है भारत सहित कई देशो में 1 मई को सार्वजानिक अवकाश होता है इस दिन मजदूर यूनियन संघटन सार्वजानिक जगहों पर इक्कठा होकर रंगारंग कार्यक्रम भाषण और देशभक्ति गीतों का आयोजन करते है और सभी खुलकर अपने विचारो को लोगो के सामने रखते है यह उत्सव ऐतिहासिक रूप से काफी महत्व रखता
संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में International Labour Organization (ILO) का गठन किया गया है जो पूरे विश्व के देशो के श्रमिको के हितो की रक्षा के लिए सदैव आगे रहता है और अन्तराष्ट्रीय मजदूर हितो की रक्षा करता है और इस दिन संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में अनेक प्रकार के विविध आयोजन भी किये जाते है और मजदूरों को अन्तराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित भी किया जाता है संयुक्त राष्ट्र बालश्रम पर भी निगरानी रखता है

महात्मा गाँधी जी भी ने कहा था की “जो देश अपने श्रमिक यानि मजदूर किसानो, कर्मचारियों को सम्मान नही कर सकते है वो देश कभी भी तरक्की की राह पर चल नही सकते है”

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