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राधे मां का क्या है सच और क्यों बनी राधे मां?

राधे मां का क्या है सच और क्यों बनी राधे मां?

फ़िलहाल वो इंटरनेट पर अपने आर्शीवाद के लिए नहीं, बल्कि अपने आचार-व्यवहार और पहनावे के लिए चर्चा का विषय बनी हुई हैं.

सुखविंदर कौर उर्फ़ राधे मां एक वह महिला है जो अपने आप को भगवान का अवतार बताती है। राधे मां हर समय लाल रंग के जोड़े में दुल्हन की तरह सजी सवरी रहती है।

राधे मां का असली नाम असली नाम सुखविंदर कौर है।उसका जन्म दोरांगला गावं में हुआ है। उसके चाहने वाले कहते हैं कि वह बचपन से ही पूजा – पाठ करती थी और अपना ज्यादातर समय अपने गावं के पास स्थित काली मंदिर में बिताती थी। कौर की पढ़ाई सिर्फ चौथी कक्षा तक हुयी है। उसके बाद सत्रह साल की उम्र में उसकी शादी मोहन सिंह से हो गयी।

उसका पति अपनी नौकरी को ढूंढने क लिए विदेश चला गया। कौर फिर से पूजा पाठ में जुट गयी। कौर ने अपनी तांत्रिक दीक्षा महंत राम दीन दास के 1008 परमहंस बाग़ डेरा मुकेरियां से, होशियारपुर में लिया। रामदीन ने तांत्रिक दीक्षा के बाद कौर को राधे मां का नाम दिया। तब से वह राधे मां के नाम से जानी जाने लगी।

अपने आप को देवी मां का अवतार कहने वाली कौर अपने भक्तों की तादात इकठ्ठा करने में कामयाब हो गयी। यह वही राधे मां है जिसके ऊपर अश्लीलता और दहेज़ उत्त्पीडन के आरोप हैं। मुंबई में रहने वाली फाल्गुनी ब्रम्हभट्ट ने राधे मां पे आरोप लगाया है की वह एक ठग है। यह कीर्तन क नाम पे अश्लील हरकते करती है। मुंबई की निक्की गुप्ता ने भी राधे मां पर दहेज़ प्रताड़ना और मारपीट का आरोप लगाया है।

तो क्या आप और हम इतने कमजोर और कम दिमाग़ हैं की हमें हर बार अपने मुश्किलों और परेशानियों में किसी इन जैसे राधे मां और बाबा जैसे लोगों की क्यों आवश्यकता होती है। क्या हमारे पास खुद कि समझदारी और खुद का दिमाग़ नहीं है जिससे हम अपनी आप अपने सभी परेशानियों का हल निकल सके और इन जैसों की दुकान बंद जाये।

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